Thursday, 24 April 2014

आत्म-विश्वास

पाने को अपनी मंज़िल
चलना होता है स्वयं 
अपने ही पैरों पर,
दे सकते हैं साथ 
केवल कुछ दूरी तक 
क़दम दूसरों के.

जुटानी होती है सामर्थ 
करना होता है विश्वास 
अपने पैरों पर,
नहीं रुकता कारवां 
देने को साथ 
थके क़दमों का,
ढूँढनी होती है स्वयं 
अपनी राह और मंज़िल
और बढाने होते हैं क़दम 
स्वयं मंज़िल की ओर.

....कैलाश शर्मा 

21 comments:

  1. अपना श्रम और अपना लक्ष्‍य दूसरों पर क्‍यों निर्भर रहे।

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  2. वाकई ! अपना लक्ष्य, अपनी मंजिल हासिल करने के लिये अपने बलबूते पर ही भरोसा करना होगा और खुद को ही लंबा सफर तय करने के लिये तैयार करना होगा ! बहुत सुंदर प्रेरणादायी पंक्तियाँ !

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  3. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (25.04.2014) को "चल रास्ते बदल लें " (चर्चा अंक-1593)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  4. बहुत खूब बहुत ही लाज़वाब अभिव्यक्ति आपकी। बधाई

    एक नज़र :- हालात-ए-बयाँ : ''किस ज़माने की बात करते''

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  5. अपना लक्ष्य खुद ही तय करना होगा ! बहुत सुंदर ......

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  6. दे सकते हैं साथ
    केवल कुछ दूरी तक
    क़दम दूसरों के.......

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  7. हौसला देती पंक्तियाँ ...आभार

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  8. बहुत ही उत्तम , व प्रेरित करती आपकी रचना , आ. कैलाश सर धन्यवाद !
    नवीन प्रकाशन -: बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ सच्चा साथी ~ ) - { Inspiring stories -part - 6 }


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  9. 100% agree ......khud ke dam par hi hame hamari pahchan milti hai ......

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  10. सही कहा आत्मविश्वास ही सफलता की कुँजी है.

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  11. आत्मविश्वास ही मंजिल तक पहुंचा सकता है । सुन्दर अभिव्यक्ति

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  12. sahi baat !! bahut sundar aur prerak rachna

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  13. अकेले ही चलना होता है इस मंजिल कि और ... साथी मिलते हैं अगर आप चलो ...
    भावपूर्ण अभिव्यक्ति ...

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  14. sach kaha apne.....atmvishwash badhati panktiyan

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  15. उत्तम, सार्थक,प्रेरक रचना ...

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