Thursday, 12 June 2014

स्व-मुक्ति

जब होने लगता
अहसास अंतर्मन को 
पाप और पुण्य,
सत्य व असत्य,
कर्म और अकर्म का,
रखने लगता है पाँव 
पहली सीढ़ी पर 
स्व-मुक्ति की.

...कैलाश शर्मा 

7 comments:

  1. बहुत अच्‍छा।

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  2. कब से होता है होना शुरु
    ये अहसास बस एक
    पता यही नहीं होता :)

    बहुत सुंदर ।

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  3. agree wid dis view....:-)
    very true...!!

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  4. मगर जब तक यह एहसास होना शुरू होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। नहीं ?

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  5. जरूरत बस शुरुआत की है ... फिर तो प्रभू उसको मार्ग दिखाते हैं ...

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  6. सच .. मुक्ति बोध होना ही आत्मज्ञान की पहली सीढ़ी है....

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