Monday, 20 October 2014

अप्प दीपो भव

बुद्ध नहीं एक व्यक्ति विशेष
बुद्ध है बोध अपने "मैं" का
एक मार्ग पहचानने का अपने आप को,
नहीं करा सकता कोई और
पहचान मेरी मेरे "मैं" से,
मिटाना होगा स्वयं ही
अँधेरा अपने अंतस का,
'अप्प दीपो भव' नहीं केवल एक सूत्र
यह है एक शाश्वत सत्य,
अनंत प्रकाश को जीवन में 
बनना होता अपना दीप स्वयं ही,
किसी अन्य का दीपक
कर सकता रोशन राह
केवल कुछ दूर तक,
फ़िर अनंत अंधकार और भटकाव
शेष जीवन राह में।

जलाओ दीपक अपने अंतस में
समझो अर्थ अपने होने का,
बढ़ो उस राह जो हो आलोकित
स्व-प्रज्वलित ज्ञान दीप से।

...कैलाश शर्मा 

18 comments:

  1. बहुत सुन्दर आपका ब्लॉग यहाँ हैँ http://safaraapka.blogspot.in/
    http://rsdiwraya.blogspot.com/

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  2. अपना दीपक ही तो गड़बड़ाने लगता है :)

    दीपावली की शुभकामनाऐं ।

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  3. जलाओ दीपक अपने अंतस में
    समझो अर्थ अपने होने का,
    बढ़ो उस राह जो हो आलोकित
    स्व-प्रज्वलित ज्ञान दीप से।

    अर्थपूर्ण , सार्थक भाव

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  4. स्व को पाओ
    करो प्रकाशित
    बुद्ध हो जाओ
    पूरी दुनिया को करो प्रकाशित

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  5. वाह ! बहुत ही सुन्दर सार्थक प्रस्तुति ! स्वयं को जानने एवं अपनी शक्ति को पहचानने के लिये प्रेरित करती एक सशक्त रचना !

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  6. जलाओ दीपक अपने अंतस में
    समझो अर्थ अपने होने का,
    बढ़ो उस राह जो हो आलोकित
    स्व-प्रज्वलित ज्ञान दीप से।
    प्रेरणा देती सार्थक प्रस्तुति श्री शर्मा जी

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  7. बहुत ही गहरे भाव, शुभ शुभ

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  8. सुंदर अर्थ ,सुंदर भाव..

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  9. बहुत हि सुंदर , सर धन्यवाद !

    आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 23 . 10 . 2014 दिन गुरुवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !
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  10. सुंदर, अर्थपूर्ण और प्रेरणादायी पंक्तियाँ...दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!!

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  11. दीपोत्सव पर सुन्दर आत्मचिंतन से भरी प्रस्तुति
    दीपोत्सव की हार्दिक मंगल कामनाएं !

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  12. गोवर्द्धन-पर्व की वधाई ! ईश्वर करे हमारे देश में नक़ली दूध-उत्पादों का निर्माण रुक जाए ! मित्र आपकी रचना भा सम्पन्न है !

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  13. Gahan prastuti...umda rachna..badhayi !!

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