Tuesday, 3 March 2015

जीवन

नहीं कोई अर्थ 
स्वयं में जीवन का,
देना होता अर्थ 
स्वयं ही जीवन को.

जीवन वह नहीं जो मिलता है 
जीवन वह है जो हम बनाते हैं.

जो भी आरोपित करते अर्थ 
वही रूप ले लेता जीवन.
रहना जाग्रत ही अर्थ जीवन का.

....कैलाश शर्मा 

10 comments:

  1. बहुत गहरी और सही बात..

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  2. सत्कर्मों की मिट्टी से मानव निज जीवन को गढता है ।
    कैलाश जी ! आपका उद्देश्य और आपका कथ्य दोनों लाजवाब है ।
    यह गूढ - चिन्तन का प्रतिफल हैं । चरैवेति - चरावेति ।

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  3. सच कहा है जीवन वाही जो हम बनाते हैं ... सटीक भाव ...

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  4. जाग्रति की बात ही श्रेष्‍ठ है, विचारणीय बात।

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  5. जीवन वह नहीं जो मिलता है
    जीवन वह है जो हम बनाते हैं.
    बहुत गहरी और सही बात आदरणीय शर्मा जी

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  6. सत्य :) सुंदर :) सार्थक :)

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